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झुक नहीं सकते / अटल बिहारी वाजपेयी

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झुक नहीं सकते / अटल बिहारी वाजपेयी टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते सत्य का संघर्ष सत्ता से न्याय लड़ता निरंकुशता से अंधेरे ने दी चुनौती है किरण अंतिम अस्त होती है दीप निष्ठा का लिये निष्कंप वज्र टूटे या उठे भूकंप यह बराबर का नहीं है युद्ध हम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्ध हर तरह के शस्त्र से है सज्ज और पशुबल हो उठा निर्लज्ज किन्तु फिर भी जूझने का प्रण अंगद ने बढ़ाया चरण प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार समर्पण की माँग अस्वीकार दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते

मौत से ठन गई / अटल बिहारी वाजपेयी

मौत से ठन गई /  अटल बिहारी वाजपेयी ठन गई!  मौत से ठन गई!  जूझने का मेरा इरादा न था,  मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,  रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,  यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।  मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,  ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।  मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,  लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?  तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,  सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।  मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,  शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।  बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,  दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।  प्यार इतना परायों से मुझको मिला,  न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।  हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,  आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।  आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,  नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है।  पार पाने का क़ायम मगर हौसला,  देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई।  मौत से ठन गई।

क़दम मिला कर चलना होगा / अटल बिहारी वाजपेयी

क़दम मिला कर चलना होगा अटल बिहारी वाजपेयी बाधाएँ आती हैं आएँ  घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों में हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा।  क़दम मिलाकर चलना होगा। हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में, अगर असंख्यक बलिदानों में, उद्यानों में, वीरानों में, अपमानों में, सम्मानों में, उन्नत मस्तक, उभरा सीना, पीड़ाओं में पलना होगा।  क़दम मिलाकर चलना होगा। उजियारे में, अंधकार में, कल कहार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को ढलना होगा।  क़दम मिलाकर चलना होगा। सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ, प्रगति चिरंतन कैसा इति अब, सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ, असफल, सफल समान मनोरथ, सब कुछ देकर कुछ न मांगते, पावस बनकर ढ़लना होगा।  क़दम मिलाकर चलना होगा। कुछ काँटों से सज्जित जीवन, प्रखर प्यार से वंचित यौवन, नीरवता से मुखरित मधुबन, परहित अर्पित अपना तन-मन, जीवन को शत-शत आहुति में, जलना होगा, गलना होगा।  क़दम मिलाकर चलना होगा।