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हे मातृभूमि / राम प्रसाद बिस्मिल

हे मातृभूमि  राम प्रसाद बिस्मिल हे मातृभूमि ! तेरे चरणों में शिर नवाऊँ । मैं भक्ति भेंट अपनी, तेरी शरण में लाऊँ ।। माथे पे तू हो चंदन, छाती पे तू हो माला ; जिह्वा पे गीत तू हो मेरा, तेरा ही नाम गाऊँ ।। जिससे सपूत उपजें, श्री राम-कृष्ण जैसे; उस धूल को मैं तेरी निज शीश पे चढ़ाऊँ ।। माई समुद्र जिसकी पद रज को नित्य धोकर; करता प्रणाम तुझको, मैं वे चरण दबाऊँ ।। सेवा में तेरी माता ! मैं भेदभाव तजकर; वह पुण्य नाम तेरा, प्रतिदिन सुनूँ सुनाऊँ ।। तेरे ही काम आऊँ, तेरा ही मंत्र गाऊँ। मन और देह तुझ पर बलिदान मैं जाऊँ ।।

ऐ मातृभूमि! तेरी जय हो / राम प्रसाद बिस्मिल

ऐ मातृभूमि! तेरी जय हो  राम प्रसाद बिस्मिल ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कांतिमय हो अज्ञान की निशा में, दुख से भरी दिशा में संसार के हृदय में तेरी प्रभा उदय हो तेरा प्रकोप सारे जग का महाप्रलय हो तेरी प्रसन्नता ही आनन्द का विषय हो वह भक्ति दे कि 'बिस्मिल' सुख में तुझे न भूले वह शक्ति दे कि दुःख में कायर न यह हृदय हो