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कौ ठगवा नगरिया लूटल हो / कबीरदास

कौ ठगवा नगरिया लूटल हो / कबीरदास कौ ठगवा नगरिया लूटल हो।। चंदन काठ कै वनल खटोलना, तापर दुलहिन सूतल हो।। उठो री सखी मोरी माँग सँवारो, दुलहा मोसे रूसल हो।। आये जमराज पलंग चढ़ि ब...