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दीवाली/ हरिवंशराय बच्चन

दीवाली साथी, घर-घर आज दिवाली! फैल गयी दीपों की माला मंदिर-मंदिर में उजियाला, किंतु हमारे घर का, देखो, दर काला, दीवारें काली! साथी, घर-घर आज दिवाली! हास उमंग हृदय में भर-भर घूम रहा ग...