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ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था / राहत इन्दौरी

ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था   राहत इन्दौरी ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था मैं बच भी जाता तो इक रोज़ मरने वाला था तेरे सलूक तेरी आगही की उम्र दराज़ मेरे अज़ीज़ मेरा ज़ख़्म भरने वाला था बुलंदियों का नशा टूट कर बिखरने लगा मेरा जहाज़ ज़मीन पर उतरने वाला था मेरा नसीब मेरे हाथ काट गए वर्ना मैं तेरी माँग में सिंदूर भरने वाला था मेरे चिराग मेरी शब मेरी मुंडेरें हैं मैं कब शरीर हवाओं से डरने वाला था

यूँ दिल में अरमान बहुत हैं / जगदीश चंद्र ठाकुर

यूँ दिल में अरमान बहुत हैं  जगदीश चंद्र ठाकुर यूँ दिल में अरमान बहुत हैं  अक्षत कम भगवान बहुत हैं | हासिल हो तो भी क्या होगा  फिर भी वे हैरान बहुत हैं | यहाँ मुखौटे का फैशन है गुल हैं कम गुलदान बहुत हैं | शहर नया दस्तूर पुराना  दर हैं कम दरबान बहुत हैं | सच बोलोगे, दार मिलेगी  झूठ कहो, ईनाम बहुत हैं |  हैं हकीम बीमार आज खुद  नुस्खे भी नादान बहुत हैं | सुबह तुम्हारी मुट्ठी में है  दुनिया में इंसान बहुत हैं |