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कहानी कांग्रेस की / हरिओम पंवार

कहानी कांग्रेस की   हरिओम पंवार गाँधी के विरोधियों पुजारियों का मेल है राजनीति सांप और नेवले का खेल है काँग्रेसियों का देखो आज तुम कमाल जी धीरे-धीरे पूरी काँग्रेस है हलाल जी कोई पश्चाताप नहीं ना कोई मलाल जी क्या हुआ जो जूतियों में बाँट रही है दाल जी कांग्रेस नेहरु और गोखले की जान थी कांग्रेस इंदिरा जी की आन-बान-शान थी कांग्रेस गाँधी जी तिलक का स्वाभिमान थी कल स्वतंत्रता -सेनानी होने का प्रमाण थी काँग्रेस अरुणा आसिफ अली का ईमान थी कांग्रेस भारती की पूजा का सामान थी कांग्रेस भिन्नता में एकता की तान थी पूरे देश को जो बांध सके वो कमान थी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस काँग्रेसी थे टंडन जी, नरेंदर देव घोष काँग्रेसी थे लाल बहादुर की अंतिम साँस काँग्रेस थी लोहिया जी की भी कभी प्यास काँग्रेस थी लाला लाजपत की चोट वाली काँग्रेस थी हर गली-गली में वोट वाली काँग्रेस थी जे.पी. की भी जली थी जवानी काँग्रेस में आजादी की पली थी कहानी काँग्रेस में काँग्रेस पार्टी जो शुरू से महान थी जो स्वतंत्र - काल में अधिक समय प्रधान थी काँग्रेसी टोपी कल जो शीश पे थी शेरों के आज पैरों में है ऐरे-गैरे नत्थू ख...

शक्ति या सौंदर्य / रामधारी सिंह "दिनकर"

शक्ति या सौंदर्य रामधारी सिंह "दिनकर" तुम रजनी के चाँद बनोगे ? या दिन के मार्त्तण्ड प्रखर ? एक बात है मुझे पूछनी, फूल बनोगे या पत्थर ? तेल, फुलेल, क्रीम, कंघी से नकली रूप सजाओगे ? या असली सौन्दर्य लहू का आनन पर चमकाओगे ? पुष्ट देह, बलवान भूजाएँ, रूखा चेहरा, लाल मगर, यह लोगे ? या लोग पिचके गाल, सँवारि माँग सुघर ? जीवन का वन नहीं सजा जाता कागज के फूलों से, अच्छा है, दो पाट इसे जीवित बलवान बबूलों से। चाहे जितना घाट सजाओ, लेकिन, पानी मरा हुआ, कभी नहीं होगा निर्झर-सा स्वस्थ और गति-भरा हुआ। संचित करो लहू; लोहू है जलता सूर्य जवानी का, धमनी में इससे बजता है निर्भय तूर्य जावनी का। कौन बड़ाई उस नद की जिसमें न उठी उत्ताल लहर ? आँधी क्या, उनचास हवाएँ उठी नहीं जो साथ हहर ? सिन्धु नहीं, सर करो उसे चंचल जो नहीं तरंगों से, मुर्दा कहो उसे, जिसका दिल व्याकुल नहीं उमंगों से। फूलों की सुन्दरता का तुमने है बहुत बखान सुना, तितली के पीछे दौड़े, भौरों का भी है गान सुना। अब खोजो सौन्दर्य गगन– चुम्बी निर्वाक् पहाड़ों में, कूद पड़ीं जो अभय, शिखर से उन प्रपात की ध...