बात/ आराधना राय उसको रोटी चाँद सी लगती है मन बहलाने का नाद लगती है चार दिन कड़ी धुप में रह कर हर शए मुझे उन्माद सी लगती है रोज़ जीते - मरते जो पेट की खातिर खाली पेट बात ना अच्छी लगत...
मन न रँगाये रँगाये जोगी कपड़ा / कबीरदास मन न रँगाये रँगाये जोगी कपड़ा।। आसन मारि मंदिर में बैठे, नाम छोड़ि पूजन लागे पथरा।। कनवां फड़ाय जोगी जटवा बढ़ौले, दाढ़ी बढ़ाय जोगी ह...