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दिसंबर 31, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या नए साल में मिलोगी? / विमल कुमार

क्या नए साल में मिलोगी? / विमल कुमार क्या तुम नहीं मिलोगी अब नए साल में या फिर मिलोगी तो उन उलझनों की तरह मिलोगी जो पैदा होती रहीं तुमसे मिलने के बाद मेरे मन में क्या तुम मिलोगी एक नई मुस्कान के साथ या फिर अपनी तकलीफों के रेगिस्तान के साथ नए साल में क्या तुम एक नए गीत की तरह मिलोगी जिसे गुनगुनाना हो आसान या ‌एक ऐसे संगीत की तरह मिलोगी जिसे बजाना हो मेरे लिए बहुत मुश्‍किल क्या तुम एक ऐसी भाषा की तरह मिलोगी जिसे समझना हो कठिन या क्या तुम ऐसी किताब की तरह मिलोगी जिसे पढ़ना हो मेरे लिए अत्यंत सरल इस बार तुम मिलोगी इस कोहरे और ठंड में तो किस तरह मिलोगी नए पत्तों और नए फूलों के रूप में? या क्या तुम मिलोगी धूप की तरह मुझ से या बर्फ की चादर की तरह मिलोगी इस जाड़े की रात में क्या तुम वाकई एक जलती हुई मोमबत्ती की तरह मिलोगी मिलोगी एक नया स्वप्न लिए एक नई उम्मीद के साथ जिस तरह कई लोग मिले थे मेरे शहर में एक-दूसरे के साथ पिछले दिनों जंतर मंतर पर या फिर नहीं मिलोगी नए साल में जिस तरह तारे कभी नहीं मिलते धरती के लोगों से आयरा, तुम केवल इतना बता दो क्य...

नए साल की तरह / कविता किरण

नए साल की तरह  कविता किरण गुज़रो न बस क़रीब से ख़याल की तरह आ जाओ ज़िंदगी में नए साल की तरह कब तक तने रहोगे यूँ ही पेड़ की तरह झुक कर गले मिलो कभी तो डाल की तरह आँसू छलक पड़ें न फिर किसी की बात पर लग जाओ मेरी आँख से रूमाल की तरह ग़म ने निभाया जैसे आप भी निभाइए मत साथ छोड़ जाओ अच्छे हाल की तरह बैठो भी अब ज़हन में सीधी बात की तरह उठते हो बार-बार क्यों सवाल की तरह अचरज करूँ 'किरण' मैं जिसको देख उम्र-भर हो जाओ ज़िंदगी में उस कमाल की तरह

नए साल की शुभकामनाएं ! / सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

नए साल की शुभकामनाएं ! सर्वेश्वरदयाल सक्सेना नए साल की शुभकामनाएँ! खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को नए साल की शुभकामनाएं!  जाँते के गीतों को बैलों की चाल को करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को नए साल की शुभकामनाएँ! इस पकती रोटी को बच्चों के शोर को चौंके की गुनगुन को चूल्हे की भोर को नए साल की शुभकामनाएँ! वीराने जंगल को तारों को रात को ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को नए साल की शुभकामनाएँ! इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख़याल को नए साल की शुभकामनाएँ! कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को हर नन्ही याद को हर छोटी भूल को नए साल की शुभकामनाएँ! उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे नए साल की शुभकामनाएँ!

मुबारक हो नया साल / नागार्जुन

मुबारक हो नया साल  नागार्जुन फलाँ-फलाँ इलाके में पड़ा है अकाल खुसुर-पुसुर करते हैं, ख़ुश हैं बनिया-बकाल छ्लकती ही रहेगी हमदर्दी साँझ-सकाल --अनाज रहेगा खत्तियों में बन्द ! हड्डियों के ढेर पर है सफ़ेद ऊन की शाल... अब के भी बैलों की ही गलेगी दाल ! पाटिल-रेड्डी-घोष बजाएँगे गाल... --थामेंगे डालरी कमंद ! बत्तख हों, बगले हों, मेंढक हों, मराल पूछिए चलकर वोटरों से मिजाज का हाल मिला टिकट ? आपको मुबारक हो नया साल --अब तो बाँटिए मित्रों में कलाकंद !