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चुनाव हो गया

चुनाव हो गया चुनाव हो गया बहुत से जीते बहुत से हारे , जैसे लगन में भी रह जाते हैं बहुत से कुँआरे। बहुतों ने वोट दिया , कितनों ने नोट दिया। कुछ को तालियाँ मिलीं , कुछ को गालियाँ मिलीं। हारने वाले रोए , वोटर मौज से सोए , देश कहां जाता है , किसी को पता नहीं। सब यही कहते हैं हमारी खता नहीं। गांव में खाने को लोग हैं तरसते , शहर में ओस बन रुपये बरसते। सिनेमा में चारों ओर मेला और धक्का है , कहीं बना काशी है , कहीं बना मक्का है। साड़ियाँ लेने दुकानों पर जाइए , देख-देख के उनकी डिजाइन मर जाइए। युवक ऐसे सूटों के दरिया में बहता है , देश में गरीबी है , कौन यह कहता है। भोजन मिले दूसरे दिन टेरिलीन चाहिए , जीवन में इश्क की बजानी बीन चाहिए। बैण्ड सरकार के चाहे कोई बजा ले , कुरसी का शासन के कोई भी मजा ले। पेट नहीं भरता है जब तक हमारा , कोई नहीं अच्छा हमें लगता है नारा।