अँधेरों से कब तक नहाते रहेंगे / गौरीशंकर आचार्य ‘अरुण’
अँधेरों से कब तक नहाते रहेंगे / गौरीशंकर आचार्य ‘अरुण’ अँधेरों से कब तक नहाते रहेंगे । हमें ख़्वाब कब तक ये आते रहेंगे । हमें पूछना सिर्फ़ इतना है कब तक, वो सहरा में दरिया बहाते रहेंगे । ख़ुदा न करे गिर पड़े कोई, कब तक, वे गढ्ढों पे चादर बिछाते रहेंगे । बहुत सब्र हममें अभी भी है बाक़ी, हमें आप क्या आजमाते रहेंगे । कहा पेड़ ने आशियानों से कब तक, ये तूफ़ान हमको मिटाते रहेंगे ।