बहसें फ़ुजूल थीं यह खुला हाल देर से / अकबर इलाहाबादी
बहसें फ़ुजूल थीं यह खुला हाल देर से / अकबर इलाहाबादी बहसें फिजूल थीं यह खुला हाल देर में अफ्सोस उम्र कट गई लफ़्ज़ों के फेर में | है मुल्क इधर तो कहत जहद, उस तरफ यह वाज़ कुश्ते वह खा के पेट भरे पांच सेर मे | हैं गश में शेख देख के हुस्ने-मिस-फिरंग बच भी गये तो होश उन्हें आएगा देर में | छूटा अगर मैं गर्दिशे तस्बीह से तो क्या अब पड़ गया हूँ आपकी बातों के फेर में |