राह कौन सी जाऊँ मैं? / अटल बिहारी वाजपेयी
राह कौन सी जाऊँ मैं?
अटल बिहारी वाजपेयी
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- चौराहे पर लुटता चीर
- प्यादे से पिट गया वजीर
चलूँ आखिरी चाल कि बाजी छोड़ विरक्ति सजाऊँ?
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- राह कौन सी जाऊँ मैं?
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- सपना जन्मा और मर गया
- मधु ऋतु में ही बाग झर गया
तिनके टूटे हुये बटोरूँ या नवसृष्टि सजाऊँ मैं?
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- राह कौन सी जाऊँ मैं?
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- दो दिन मिले उधार में
- घाटों के व्यापार में
क्षण-क्षण का हिसाब लूँ या निधि शेष लुटाऊँ मैं?
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- राह कौन सी जाऊँ मैं ?
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